लोग आखिर सरमाते इसीलिए है।
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दोस्तो हम आपको बताएंगे कि लोग आखिर सरमाते kau है।
- कुछ लोग अंतर्मुखी होते हैं और अक्सर कुछ लोग सोचते हैं की अंतर्मुखी लोग शर्मीले होते हैं।
- कुछ लोगों को बचपन में ऐसे माहौल में पाला गया है की उनको शर्माना सीखा दिया जाता है। संस्कृति और सभ्यता का इस पर बहुत अधिक प्रभाव है।
- कुछ लोगों को सामजिक चिंता का विकार होता है और ऐसे लोग दूसरों की उपस्थिति में शरमाते हैं और यह एक बिमारी है।
विकासवादी मनोविज्ञान: अगर हम मानव के इतिहास में बहुत हज़ार साल पीछे जाएँ तो शर्म एक विकासवादी तंत्र है जो हमारे दिमाग में विकसित हुआ। क सिस्टम का एक भाग है और यह हमसे पहले हमारे पूर्वज जानवरों में भी था। इसका मुख्या काम है हमारे अंदर भावनाओं की जागृत करना। जब कभी भी हम चिंता करते हैं तो इसका स्रोत अमिग्डला ही है। यह भाग जैविक है और लगभग सभी लोगो में अलग अलग मात्रा में होता है। एक शोध में इसको आप साफ़ साफ़ देख सकते हैं। जै
शर्म का रक्षात्मक तंत्र(डिफेंसिव मैकेनिज्म) की तरह उपयोग : बहुत लड़कों को इसका अनुभव होगा। क्या आपने कभी नोटिस किया है की अगर कोई सुन्दर लड़की जिसपर आप आकर्षित हैं, उनसे बात करने में थोड़ी शर्म आती है ? इसकी क्या वजह है ? यह शर्म हम जिनसे आकर्षित हैं उनके सामने ही क्यों आती है? यह सबमे अलग अलग मात्रा में होती है लेकिन सबमे इसकी वजह एक है।
इसकी वजह है चिंता और अनजाना सा डर । अगर कोई लड़का किस ऐसी लड़की को देखे जो उसको सुन्दर लगे तो शर्म इस लिए आती है की अगर लड़की में मना कर दिया तो ? अगर उसको पहले से कोई बॉयफ्रेंड है तो ? यह सारी बातें दिमाग के लिम्बिक भाग में आती हैं। अधिकतर हम इसको बिना जानकारी के करते हैं क्योंकि यह हमारे अवचेतन मन से निर्धारित होती है।
हम आपको अपना खुद का उदाहरण देकर समझाते हैं। जब उनको पहली बार देखा तो दिल की धड़कने तेज हो गयीं। लगा गाला सूख गया है। उनसे आँखे चार होते ही अचानक पलकें झुकती चली गयीं। यह सब चिंता के कारण हुआ। कहीं वो मन कर दें तो ? इसी की चिंता थी लेकिन हम इस चिंता से अनजान थे।
संस्कृति और समाज : अगर पूरब और पश्चिम की सभ्यता में मूल अंतर देखें तो जब हम किसी से मिलते हैं तो कैसे उनको देखते हैं। पूर्वी सभ्यता में जिसमे एशिया के लोग आते हैं, जब किसी से मिलते हैं तो देर तक आँख मिलाते हैं। अगर किसी से देर तक आँखे मिलाएं तो उनको शर्म महसूस हो सकती है। पश्चिम सभ्यता में अक्सर ठीक से आँख से आँख मिला कर नहीं देखते और सभ्यता में इसको बहुत ही बुरा मन जाता है और रूखे पन से संभंधित माना जाता है। इस तरह का शर्माना माँ बाप और समाज बच्चों को कंडीशनिंग से सिखाता है।
सामजिक चिंता का विकार : कुछ लोग किसी और के सामने जाकर बात करने से इतने डरते हैं की उनके पसीने छूटने लगते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक बिमारी है। इसको शर्म से कभी नहीं जोड़ना चाहिए। इसके निम्नलिखित लक्षण होते हैं।
- पसीना आता है, दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं और लगता है दिमाग शुन्य हो गया हो।
- पेट में मचली की तरह होने लगती है।
- आँखें नहीं मिला पाते हैं।
- अन्य लोगों के सामने बहुत आत्म-सचेत रहें और शर्मिंदा और अजीब महसूस करें और बहुत डरते हैं कि अन्य लोग उन्हें जज करेंगे।
- ऐसे लोग उन हर स्थान से दूर रहना चाहते हैं जहां अन्य लोग हों।
शर्म में और मनोवैज्ञानिक बिमारी में अंतर समझें। अगर किसी को मनोवैज्ञानिक विकार है तो आप मनोवैज्ञानिक डॉक्टर से मिलें। इसके लिए दवाएं भी हैं और मनोवैज्ञानिक चिकित्सा जो की कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी से की जाती है दोनों उपलभ्द है।
इन्हीं वजहों से लोग शर्माते हैं
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